कैमोर निलू रजक हत्याकांड में कानून ने वह कदम उठाया जिसने अपराधियों की नींव हिला दी और समाज में यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि हिंसा की कीमत बहुत भारी होती है। न्याय व्यवस्था की पहली सख्त कार्रवाई के तहत हत्या के एक आरोपी का अवैध भवन बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई से आमजन में कानून व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।यह दृश्य सिर्फ एक मकान टूटने का नहीं था बल्कि उन सभी लोगों के लिए चेतावनी थी जो विवादों को हिंसा और हत्या तक ले जाने की सोच रखते हैं। न्याय व्यवस्था ने साफ कर दिया कि विवाद की एक सीमा होती है और उस सीमा को लांघकर किसी की जान लेना इस देश में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह भारत है यहां कानून सर्वोपरि है और कानून से ऊपर कोई नहीं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी मनीष परते ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए आज प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में उक्त भवन को गिराया गया। पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में पारदर्शिता के साथ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न की गई।

निलू रजक का परिवार आज न्याय व्यवस्था के संरक्षण में है। वर्षों नहीं बल्कि कठोर और त्वरित कार्रवाई के जरिए न्याय की पहली सीढ़ी चढ़ते हुए प्रशासन ने यह जता दिया कि अपराध करने वालों के लिए अब न घर सुरक्षित हैं न ठिकाने। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में अन्य दोषियों के मकानों पर भी बुलडोजर चल सकता है जिससे अपराधियों में भय और समाज में अनुशासन स्थापित होगा।इस कार्रवाई के दौरान सैकड़ों पुलिस बल की मौजूदगी रही।
नगर के हजारों लोगों ने अपनी आंखों से देखा कि दुर्भावनापूर्ण कृत्य का अंजाम क्या होता है। यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि समाज को दिया गया एक जीता-जागता सबक था हिंसा बोओगे तो विनाश काटोगे। आज कानून केवल कागजों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में स्थापित होता दिख रहा है। निलू रजक हत्याकांड में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में अपराधियों के लिए डर पीड़ितों के लिए उम्मीद और समाज के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है।