हरेमाधव दरबार में अन्न शगुन रस्म से अन्न सेवा का शुभारंभ
कटनी माधवनगर स्थित बाबा माधवशाह भवन में रविवार को श्रद्धा और सेवा की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। हरेमाधव वर्सी पर्व की तैयारियों के बीच जीवनमुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी की कृपा से अन्न शगुन रस्म के साथ अन्न सेवा का शुभारंभ किया गया। वातावरण भक्ति और सेवा भाव से सराबोर था — जहां माताएं और बहनें श्रद्धा से अन्न बीनकर, दाल-चावल, गेहूं और मसालों से कंकर-पत्थर अलग करतीं नज़र आईं।
सतगुरु जी के वचनों में इस सेवा का गूढ़ अर्थ निहित है। वे समझाते हैं कि “जिस प्रकार अन्न से मलीनता निकालकर उसे पवित्र किया जाता है, उसी प्रकार नाम भक्ति और सेवा से हृदय की अशुद्धियों को मिटाकर आत्मा को निर्मल बनाया जाता है।” यानी, सेवा केवल कर्म नहीं, साधना है।
अन्न शगुन रस्म के दौरान दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। संगतें सेवा में रत थीं और सतगुरु के श्रीचरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रही थीं। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पूज्य गुरुपिता ताराचंद पेसवानी, श्री भगवानदास सबनानी (प्रदेश महामंत्री भाजपा, भोपाल), श्री शंकर लालवानी (सांसद, इंदौर), श्री विशाल गिदवानी (पार्षद, इंदौर), श्री दीपक टंडन (भाजपा जिलाध्यक्ष, कटनी) सहित हरेमाधव परमार्थ सत्संग समिति के सेवादार गंगाराम कटारिया, पीताम्बर टोपनानी, बबल कटारिया, करमचंद आसरानी, वरियलदास वाधवानी, भगवानदास टिलवानी, देवानंद असरानी, डॉक्टर वी.एम. राजपाल (अध्यक्ष बाबा माधवशाह चिकित्सालय), मनीष दरयानी (अध्यक्ष सिंधी मेला समिति, भोपाल), नरेश (विद्य व्यापारी महासंघ, रीवा), महेश ठारवानी (प्रदेश मंत्री सिंधु सभा, म.प्र.), आशीष गुप्ता (महामंत्री भाजपा, कटनी), और वाघीच आनंद ने उपस्थित होकर पावन श्रीचरणों में नमन किया।
इस मौके पर पूज्य संतों ने कहा कि जैसे अनाज से धूल-कंकर हटाने पर ही वह उपयोग योग्य बनता है, वैसे ही सेवा और भक्ति से आत्मा शुद्ध होकर परमात्मा के सान्निध्य के योग्य बनती है।
हरेमाधव वर्सी पर्व केवल आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान का उत्सव है। सतगुरु बाबा माधवशाह और सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व संत परंपरा की दिव्यता का प्रतीक है। बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के उपदेशों, लीलाओं और सत्संग वाणियों से संगतों को आत्म-साक्षात्कार की प्रेरणा मिलती है।