आए दिन माधवनगर में घटित हो रहे जानलेवा हादसे, प्रदूषण की समस्या से पीड़ित हैं रहवासी।
माधवनगर थाना क्षेत्र में गत दिवस ट्रक की चपेट में आने से एक सफाईकर्मी की मौत होने के बाद भी जिला प्रशासन की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है। वहीं, जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है।
पिछले कई दिनों से समय-समय पर माधवनगर सहित पूरे जिले में यातायात की समस्या सोशल मीडिया पर लगातार दिखाई जा रही है, लेकिन यातायात विभाग का इन समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं होना, यातायात विभाग की कथनी और करनी को साफ़ प्रदर्शित कर रहा है।
माधवनगर जैसे व्यस्ततम क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही का मुख्य कारण आवासीय क्षेत्र में संचालित मिलें एवं उद्योग हैं, जो प्रशासन के भ्रष्ट रवैये की देन हैं। इन मिलों व फैक्ट्रियों के कारण दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है और लोगों के लिए समस्या का कारण भी बनी हुई हैं।
बगैर अनापत्ति प्रमाणपत्र के संचालित हो रही मिलों व फैक्ट्रियों को अन्यत्र, शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने की कार्यवाही आज तक पूरी नहीं की गई है। जिला प्रशासन द्वारा नियमविरुद्ध चल रही मिलों व फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे, यह जनमानस का एक अहम सवाल है और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह भी लगा रहा है।
जिला प्रशासन के इस रवैये के परिणामस्वरूप माधवनगर के रहवासियों में अपने बच्चों के प्रति डर बना रहता है। साथ ही, ट्रकों की आवाजाही से धूल के गुब्बार और रोड क्षतिग्रस्त होने जैसी परेशानियों से भी यहां के नागरिक ग्रसित हैं।
विभागों के अनापत्ति प्रमाणपत्र के बगैर ही बिजली विभाग ने इन्हें (मिलों को) बिजली के कनेक्शन ही नहीं, ट्रांसफार्मर तक दे दिए हैं।