कटनी जिले में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) द्वारा धान उपार्जन के बाद उसके सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिले में करोड़ों से अरबों रुपये मूल्य की धान खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है, जो मौसम की मार और नुकसान की आशंका को बढ़ा रही है।
जमीनी हालात यह हैं कि नान के अधिकारी भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, जबकि उच्चाधिकारियों के सामने व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के दावे किए जा रहे हैं। वास्तविकता इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है, जिससे शासन को गुमराह किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कटनी जिले में कुल 72 राइस मिलर्स पंजीकृत हैं, लेकिन नान द्वारा अब तक लगभग केवल 25 मिलर्स से ही धान से चावल बनाने का अनुबंध किया गया है। आरोप है कि इसमें कुछ वही मिलर्स हैं, जिन पर पूर्व में धान की कालाबाजारी में संलिप्त रहने के आरोप लग चुके हैं। राइस मिल एसोसिएशन की हड़ताल के दौरान भी इन्हीं मिलर्स द्वारा कथित रूप से बैकडोर तरीके से नान के साथ एग्रीमेंट किए जाने की चर्चाएं रही हैं।बताया जा रहा है कि यदि नान चाहता तो सभी पंजीकृत मिलर्स से अनुबंध कर धान का सीधा उठाव कराया जा सकता था, जिससे खुले में भंडारण की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। लेकिन ऐसा न कर परिवहन व्यवस्था के जरिए कथित रूप से लाभ कमाने का रास्ता अपनाया गया।
सूत्र यह भी बताते हैं कि बीते कुछ वर्षों से “क्रॉस मूवमेंट” के नाम पर करोड़ों रुपये के खेल को अंजाम दिया जा रहा है। आरोप है कि जहां सामान्य परिवहन लागत 10 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए, वहीं क्रॉस मूवमेंट के जरिए इसे बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल तक दिखाया जाता है।
आरोपों के मुताबिक, पूरे मामले में विभागीय मंत्री से लेकर स्थानीय स्तर के अधिकारियों तक की मिलीभगत की चर्चा है, जिसके चलते नान अधिकारियों में किसी प्रकार का भय या जवाबदेही नजर नहीं आ रही है। नतीजतन, शासकीय धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग होने की आशंका जताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि खुले आसमान के नीचे पड़ी धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा और मोहन सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करेगा?