कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर अवैध खनन के विरुद्ध सघन जांच अभियान की खबरें जारी कर दी गईं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है! बरही तहसील की बहिर्घटा खदान, बड़वारा तहसील की इमलिया–लादहर खदान (उमराड़) नदी और लादहर खदान स्वीकृत ही नहीं हैं,
फिर भी आज भी नदी की मुख्य धारा को मोड़कर बीच नदी में रैंप बने हुए हैं। खनिज विभाग ने अब तक एक भी रैंप नहीं हटवाया?

वहीं गुड़ा कला (विलायत कला) पावर हाउस के पास पूर्व ठेकेदार धनलक्ष्मी मर्चेंट का आज भी हजारों ट्रक रेत का अवैध स्टॉक खुलेआम पड़ा है और यह सब प्रशासन की आंखों के सामने ही है । फिर अवैध रेत माफिया को खुला संरक्षण दिया जाना प्रशासनिक साठ गांठ को साफ उजागर कर रहा है ।
कटनी कलेक्टर और खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित की चुप्पी समझ से परे है । इस पर कार्रवाई कब होगी । या फिर जांच अभियान सिर्फ कागज़ों और प्रेस विज्ञप्तियों तक ही सीमित रहेगा ।