छिंदवाड़ा। महिला बाल विकास विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल उस समय खुल गई जब लोकायुक्त टीम ने सोमवार, 6 अक्टूबर को विभाग की पूरी टीम को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई से पूरे जिले के प्रशासनिक हलकों में सनसनी फैल गई है।
मामला ग्राम उमरघोड़ का है, जहां आवेदिका पूजा ऊइके का चयन वरीयता के आधार पर आंगनवाड़ी सहायिका पद पर हुआ था। चयन के बाद आवेदिका को जॉइनिंग लेटर तो दे दिया गया, लेकिन विभाग की परियोजना अधिकारी सीमा पटेल ने “इनाम” के रूप में ₹50,000 की मांग कर डाली। यह रकम सुपरवाइजर लक्ष्मी पंडोले और बिंदु माहौर के ज़रिए मांगी जा रही थी।
पूजा ऊइके ने रिश्वत की इस मांग की शिकायत लोकायुक्त जबलपुर में की। सत्यापन के बाद आज ट्रैप की कार्रवाई की गई, जिसमें सुपरवाइजर आरती आम्रवंशी को ₹20,000 की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
लोकायुक्त की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(b), 13(2), 12 के तहत मामला दर्ज किया है।
पकड़े गए आरोपी: 1. सीमा पटेल, परियोजना अधिकारी, जुन्नारदेव, जिला छिंदवाड़ा, 2. आरती आम्रवंशी, महिला सुपरवाइजर, जिला छिंदवाड़ा, 3. लक्ष्मी पंडोले, महिला सुपरवाइजर, छिंदवाड़ा, 4. बिंदु माहौर, महिला सुपरवाइजर, छिंदवाड़ा
ट्रैप दल में शामिल अधिकारी: दल प्रभारी निरीक्षक उमा कुशवाहा, शशि मुस्कुले, निरीक्षक जितेंद्र यादव, तथा लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई अंजाम दी।