अंगदान कर व्यक्ति किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जिंदगी देने और बचाने के नेक व पुण्य कार्य में सहभागी बन सकता है। वहीं देहदान करने से चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्रों को मदद मिलेगी, जिससे वे शरीर विज्ञान की बेहतर प्रायोगिक जानकारी हासिल कर भविष्य में अच्छे चिकित्सक बन सकेंगे।जिसका समाज को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा। शासन के प्रावधानों के तहत अंगदान या देहदान करने वालों के अंतिम संस्कार के समय गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जाएगा।
देहदान की अपील का अर्थ है, मृत्यु के बाद अपने शरीर को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करने का निस्वार्थ कार्य, जो मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण और चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में मदद करता है, और इसके लिए पंजीकरण फॉर्म भरकर, परिवार से सहमति लेकर और संबंधित मेडिकल कॉलेज या संस्थान को सूचित करके किया जा सकता है।ताकि भावी डॉक्टरों को मानव शरीर को समझने में मदद मिले और समाज में एक नेक कार्य हो सके।
इन्हे मिलेगा गार्ड ऑफ ऑनर
अगर नागरिक हार्ट हृदय, लिवर, गुर्दे जैसे अंगों का दान करता है तो उसे गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जाएगा। ये आदेश मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों को भेजे गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस पहल का उद्देश्य अंगदान और देहदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है और इन महान दानदाताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
साथ ही देहदान अथवा हृदय, लीवर व गुर्दा दान करने वाले लोगों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी जाएगी। साथ ही उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया जाएगा।
देहदान करने से भविष्य के डाक्टरों को पढ़ाई के लिए मानव शरीर उपलब्ध हो जाता है। वहीं अंगदान से मिले अंग का प्रत्यारोपण कर किसी जरूरतमंद, घायल व्यक्ति की ज़िंदगी बचाईं जा सकती है।