स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो संबंधित वार्ड के स्थायी निवासी हैं और पूर्व में नियमित रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करते रहे हैं। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना समुचित जांच और सत्यापन के की जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि खास तौर पर उन मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जो किसी अन्य राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े बताए जा रहे हैं। जबकि जिन लोगों द्वारा इन मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, वे न तो संबंधित वार्ड के निवासी हैं और न ही शहर के, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बताए जा रहे हैं, जो निर्वाचन नियमों का खुला उल्लंघन है।
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उन्होंने स्वयं किसी भी प्रकार का आवेदन, सहमति या नाम हटाने से संबंधित कोई अनुरोध ही नहीं किया था।
निर्वाचन नियमों के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा सीमित संख्या, लगभग 10 आपत्तियां ही दर्ज की जा सकती हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में एक ही व्यक्ति द्वारा 100 से 150 मतदाताओं के विरुद्ध सामूहिक आपत्तियां दर्ज किए जाने की बातें सामने आ रही हैं, जो नियमों के पूरी तरह विपरीत, संदेहास्पद और अवैधानिक मानी जा रही हैं।
इतना ही नहीं, कुछ ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में जोड़े जा रहे हैं, जो वास्तव में उस वार्ड में निवास ही नहीं करते। यह पूरा मामला निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर मांग की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पहचान दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सत्यापित की जाए, और यदि जांच में फर्जी या दुर्भावनापूर्ण आपत्तियां सामने आती हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही यह भी मांग उठी है कि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जाए, ताकि लोकतंत्र की पवित्रता और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
बाइट – अमित शुक्ला
कांग्रेस शहर अध्यक्ष