कटनी जिले के लिए गर्व का क्षण है। ब्रिगेडियर (डॉक्टर) तमोजीत विश्वास मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत होने जा रहे हैं — और इसके साथ ही वे भारतीय सेना में इस शीर्ष पद तक पहुँचने वाले कटनी की धरती के पहले अधिकारी बन गए हैं। यह केवल एक प्रमोशन नहीं, बल्कि उस मिट्टी की प्रतिष्ठा है जिसने ऐसे अनुशासनप्रिय, विद्वान और उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी को जन्म दिया।
शिक्षा से लेकर सैन्य सेवा तक अद्भुत सफर ब्रिगेडियर (डॉक्टर) तमोजीत विश्वास ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हायर सेकंडरी स्कूल कटनी में प्राप्त की। इसके बाद गवर्नमेंट तिलक कॉलेज कटनी से बीएससी, साइंस कॉलेज जबलपुर से एमएससी (फिजिक्स), एमए (मनोविज्ञान), एमएड, पीएचडी और विदेशी भाषा झोंखा में द्विभाषीय डिप्लोमा हासिल किया।
यानी शिक्षा की हर सीढ़ी पर उन्होंने साबित किया कि कठोर अध्ययन और निरंतर सीखने का संकल्प ही बड़े पदों का आधार है।
1993 — लेफ्टिनेंट के रूप में शुरुआत, अब मेजर जनरल 12 जून 1993 को लेफ्टिनेंट के रूप में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। तीन दशक से भी अधिक समय तक देश की सेवा करते हुए वे विभिन्न फॉर्मेशनों, सेना शिक्षा कोर प्रशिक्षण कॉलेज एवं केंद्र, राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाते रहे।उनकी कार्यशैली — अनुशासन, संवेदनशीलता, नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण का अनूठा संगम मानी जाती है।
सम्मान… जो उनके समर्पण की गवाही देते हैं उनकी असाधारण सेवाओं को देखते हुए भारतीय सेना ने —
- वर्ष 2012 : सैन्य प्रशिक्षण कमांड प्रशस्ति पत्र
- वर्ष 2013 : पश्चिमी कमांड प्रशस्ति पत्र
से सम्मानित किया। ये सम्मान बताते हैं कि वे केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रेरणा बनने वाले सैन्य नेतृत्व का सशक्त उदाहरण हैं।
कटनी से दिल्ली — नई जिम्मेदारी, नई उड़ान वर्तमान में वे सेना शिक्षा कोर प्रशिक्षण कॉलेज एवं केंद्र में कमांडेंट के रूप में कार्यरत हैं। 1 दिसंबर 2025 से वे मेजर जनरल के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे और सेना मुख्यालय दिल्ली में अतिरिक्त महानिदेशक, सेना शिक्षा कोर के पद पर अपनी नई भूमिका निभाएँगे। यह पद उन्हें नई ऊँचाइयाँ ही नहीं देगा, बल्कि भारतीय सेना की शिक्षा प्रणाली में और सुधार लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका भी सुनिश्चित करेगा।
परिवार का योगदान — सैनिक के पीछे खड़ा एक और मजबूत मोर्चा उनकी सफलता के पीछे उनकी पत्नी, पुत्री और माता-पिता का त्याग, धैर्य और सहयोग रहा है। एक सैनिक का परिवार अक्सर स्वयं भी एक अलग तरह की ड्यूटी निभाता है — और यही समर्पण इस उपलब्धि में स्पष्ट दिखाई देता है।
कटनी बंगाली समिति और पूरे जिले की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ और सम्मान।