विजयराघवगढ़ में ताम्रकार समाज के तत्वावधान में भगवान श्री सहस्रबाहु (सहस्रार्जुन) जयंती बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। सुबह से ही समाज के सदस्य पारंपरिक परिधानों में सजे नजर आए और पूरे उत्साह के साथ आयोजन में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना और भगवान सहस्रबाहु की आरती से हुई। इसके बाद समाज के सैकड़ों महिला-पुरुषों और युवाओं की सहभागिता के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरी। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, वहीं भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग नाचते-गाते नजर आए।
पूरे नगर में धार्मिक माहौल बना रहा। शोभायात्रा के समापन के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। समाज के वरिष्ठजनों ने भगवान सहस्रबाहु के जीवन आदर्शों — सत्य, साहस और समाज सेवा — को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

इस मौके पर ताम्रकार समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा वर्ग और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि समाज की एकता और संस्कृति की पहचान ऐसे ही आयोजनों से बनी रहती है।
विजयराघवगढ़ में ताम्रकार समाज द्वारा इस तरह का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज की एकजुटता और सामाजिक समरसता की मिसाल भी बन गया।