विधायक पाठक ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि पुल की मरम्मत का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है, जिससे हजारों लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस कार्य को जल्द शुरू कराया जाए और जिम्मेदारी किसी सक्षम निर्माण एजेंसी को सौंपी जाए।
जानकारी के अनुसार, इस पुल की मरम्मत पर 26 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। लेकिन पुल की तकनीकी जटिलताओं के कारण अब तक तीन बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ठेकेदार काम छोड़ चुके हैं। विधायक संजय पाठक ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि यह कार्य सेतु निर्माण निगम के बजाय बाणसागर परियोजना के माध्यम से कराया जाए, ताकि अनुभवी इंजीनियरों की टीम द्वारा यह काम समय पर और गुणवत्तापूर्वक पूरा किया जा सके।
यह पुल बरही–मैहर मार्ग पर बाणसागर बैकवॉटर के ऊपर बना है और मैहर से अमरकंटक को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है। पिछले तीन वर्षों से पुल क्षतिग्रस्त है, जिसके चलते भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। फिलहाल सिर्फ छोटे वाहनों को ही निकलने की अनुमति दी गई है।

अब सवाल उठता है — आखिर क्यों बंद पड़ा है कुटेश्वर का पुल?
दरअसल, लगभग तीन साल पहले पुल के पियर क्रमांक 10 के डेक स्लैब में तकनीकी खराबी, यानी ‘डिफ्लेक्शन’ पाया गया था। इससे पुल पर भारी वाहनों के गुजरने से कंपन बढ़ने लगी और दुर्घटना की आशंका बनी रही। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी वाहनों का आवागमन तत्काल बंद कर दिया।
विधायक संजय पाठक ने इस मुद्दे को कई बार उठाया और तत्कालीन कलेक्टर से तकनीकी जांच भी करवाई, जिसके बाद छोटे वाहनों के लिए पुल को अस्थायी रूप से खोला गया। हालांकि, बस, ट्रक और हार्वेस्टर जैसे बड़े वाहनों के न चल पाने से क्षेत्र के कृषि कार्य, व्यापार और आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है।
विधायक पाठक का कहना है कि कुटेश्वर पुल का निर्माण मूल रूप से बाणसागर परियोजना के अंतर्गत हुआ था, इसलिए उसी एजेंसी को दोबारा इसकी जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उनके अनुसार, बाणसागर की इंजीनियरिंग टीम के पास वह तकनीकी अनुभव है, जिससे यह पुल सुरक्षित और स्थायी रूप से दुरुस्त किया जा सके।