1962 भारत-चीन युद्ध में रेजांग ला की लड़ाई के शहीदों को नमन, अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर यादव समाज की पहल, मध्यप्रदेश के गाँव-गाँव तक पहुँच रही कलश यात्रा।
भारत-चीन युद्ध के इतिहास की सबसे बहादुर कहानियों में से एक-रेजांग ला की लड़ाई। साल 1962 में जब लद्दाख की बर्फ़ीली घाटी में जंग छिड़ी, तब 13 कुमाऊँ रेजीमेंट की ‘सी’ कंपनी के 120 जवानों ने 500 से ज़्यादा चीनी सैनिकों से मोर्चा लिया। इनमें से ज़्यादातर जवान अहीर यादव समुदाय से थे। देश की मिट्टी के लिए सबने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

उन्हीं शहीदों की याद में आज यादव समाज ने कलश यात्रा निकाली। यात्रा का मक़सद सिर्फ़ शहीदों को श्रद्धांजलि देना ही नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अहीर रेजीमेंट की मांग को एक बार फिर बुलंद करना भी है।
यह कलश यात्रा शाहनगर, टिकरिया, पवई, अमानगंज और पिपरवाह जैसे इलाक़ों से गुज़रते हुए अब पन्ना की ओर बढ़ रही है। जगह-जगह लोगों ने इस यात्रा का स्वागत किया और शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।