शारदेय नवरात्र के पावन अवसर पर समूचा संसार माता शक्ति की आराधना में लीन है। अलसुबह से माता रानी के दरबार में जल-पुष्प अर्पित करने और आरती-पूजन के लिए मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। देवी माता की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण हो रही हैं। कटनी जिले में कई शक्ति पीठ स्थित हैं। इन्हीं में एक है ग्राम निगहरा स्थित माँ कंकाली धाम शक्ति पीठ। जहां नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का तांता लगा हुआ है। माँ कंकाली धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां माता नेत्र रूप में विराजमान हैं।
मान्यता है कि पहाड़ी में नेत्र रूप में विराजी माँ कंकाली की कृपा से ही सदियों से ग्रामीण सुख-समृद्धि और खुशहाली का जीवन जी रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कई दशक पहले गांव के एक कुएं में पानी भरते समय महिला के घड़े में एक आंख जैसी आकृति का पत्थर आ गया था।

घड़े में यह नेत्र रूपी पत्थर चमक रहा था। उसी रात गांव के पंडित को सपना आया कि माँ गांव में आ चुकी हैं और उनकी स्थापना पहाड़ी पर की जाए। इसके बाद विधि-विधान से मां कंकाली की स्थापना निगहरा के पहाड़ में की गई। कटनी से लगभग 25 किलोमीटर दूर बरही रोड पर स्थित निगहरा गांव में माँ कंकाली धाम को लेकर ग्रामीणों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि माता की कृपा से गांव में कभी भी कोई भीषण संकट नहीं आया। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रारंभ में यहां छोटी-सी मढ़िया बनाकर पूजा की जाती थी। बाद में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया।
वर्तमान में 257 सीढ़ियां चढ़कर भक्त माँ के दरबार में पहुंचते हैं। नवरात्र में यहां जवारा-कलश स्थापित किए जाते हैं और भक्त पैदल ही जल अर्पित करने पहाड़ी में स्थित मंदिर आते हैं। नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु माँ कंकाली के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। माना जाता है कि मां की कृपा से हर वर्ष जवारा-कलशों की संख्या बढ़ती जाती है। इसी वजह से निगहरा धाम नवरात्र में विशेष आस्था और आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
पहाड़ी में माता रानी के मंदिर के साथ ही अन्य देवियों के मंदिर भी स्थापित हो चुके हैं। मंदिर पहुंचने से पहले अंजनी धाम के द्वार पर हनुमान जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिनके दर्शन उपरांत ही माता रानी के दर्शन किए जाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ पर तीन तरफ से सीढ़ियां बनाई गई हैं।